हमें खाबो के साथ जीने दो.....
यादो में ही सही
यूही कभी कभी
यूही यही कही
मुझे जीने दो
सपनो में सही
अपनों में सही
मुझे जीने दो
संगीत में कही
रेडियो की गीत में सही
रेत के धुंध में
बारिशो के बूंद में
खुदा के वास्ते , वफा के साथ जीने दो
तीखी तीखी सी बुँदे
बहकी बहकी सी यादे
भीग गया मेरा मन!
पलoo की घूंट
कोरे नयन
रब का ये आयना
झरने फुहारे , लारिया और कालिया
झम्ज्हमति चांदनी ,बहाया बे सरम
kon ? ye pani
बरसो बरसो रे अम्बर का पानी ,
जिशे पिकर है धरती दीवानी!
No comments:
Post a Comment