सपनों को खोते देखा मैंनेआंखो से ओझल पाया मैंने,
खाबो के पर ओंधे ही थे
वादे क्यों रूखे सूखे से पर
जलता ये चित्त,
मन शांत सा,
आंखे अचूक ,
पल रो रहा.......................................
उठ जाग जा !
वो खाब था.
अब हुई सुबह,
अब मोन त्याग
कर दे फतह.
रुकक जा ठहr,
कही ये चांदनी,
या तेरा वेहम;
कुछ खाबो के खो जाने से, यादे नहीं मिटा करती
फूलो का यूं मुरझाने से, सावन नहीं मारा करती,
दो पल यूं ही खो जाने से, जीवन नहीं सोया करती
आँखों से आंशु टपका ने से, jakhamo नहीं भरा करता
Shutta को यूं सिस्काने से, yoowan नहीं ढला करता..............................
क्यों?
to be continued..................

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